कृत्रिम होशियारी

Image

कृत्रिम होशियारी

कृत्रिम होशियारी

कंप्यूटर मॉडलिंग आधुनिक दवा विकास का एक अहम हिस्सा है।

प्रोमोमेड ग्रुप कई एडवांस्ड कंप्यूटेशनल और मेडिसिनल केमिस्ट्री तरीकों का इस्तेमाल करता है। इससे नई दवा बनाने में लगने वाला समय और खर्च कम होता है, जिससे नई दवाओं की असरदारता और सुरक्षा पर ध्यान देना आसान हो जाता है।

कंप्यूटेशनल तरीकों से दवा बनाने का तरीका 'टारगेट-ओरिएंटेड' (लक्ष्य-केंद्रित) होता है; 'ब्लाइंड स्क्रीनिंग' तकनीकों के उलट, आधुनिक मॉलिक्यूल्स को किसी खास मकसद के लिए तैयार किया जाता है, जिसमें केमिकल कंपाउंड के हर हिस्से को एक खास काम करने के लिए डिज़ाइन किया जाता है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग तकनीकें

रिसर्च और डेवलपमेंट के सभी चरणों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल एक मुख्य फोकस एरिया है।

जानकारी खोजने और उसका विश्लेषण करने के साथ-साथ चीज़ों की खास विशेषताओं का अनुमान लगाने के लिए भी AI का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाता है। नए मॉलिक्यूल्स की वर्चुअल लाइब्रेरी बनाने के लिए आधुनिक जेनरेटिव AI मॉडल का इस्तेमाल किया जाता है। PROMOMED ग्रुप में AI टेक्नोलॉजी को लागू करने के तहत, कंपनी लगातार अपने इंटरनल *इन सिलिको* (in silico) प्लेटफॉर्म को बेहतर बनाती रहती है, जिसमें कई तरह के एडवांस्ड सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन शामिल हैं।

प्रायोगिक अध्ययन

एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के बावजूद, एक ज़रूरी कदम यह है कि मॉडलिंग के ज़रिए चुने गए कंपाउंड्स की क्षमता को कई तरह के एक्सपेरिमेंटल स्टडीज़ के ज़रिए कन्फर्म किया जाए। इसमें मॉडर्न "इन सिलिको" – "इन विट्रो" – "इन विवो" अप्रोच को अपनाया जाता है।